सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका और लाभ Right way and benefits of Surya Namaskar

सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका और लाभ  Right way and benefits of Surya Namaskar

  सूर्य नमस्कार करने का सही तरीका और लाभ

सबसे पहले अपने आशन पर खड़े हो जाएं. अपने दोनों पन्जे एक साथ जोड़ कर रखें और पूरा बजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें. अपनी छाती फुलाये और कंधे ढीले रखें.

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श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएं और श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आए. हाथों को ऊपर उठाएं और पीछे ले जाएं फिर बाजुओं को बाइसेप्स यानी कि कानों के पास लेकर आए इस आसन में पूरे शरीर को एडीयो से लेकर हाथों की उंगलियों तक सभी अंगों को ऊपर की तरफ खींचने की कोशिश करे.


अपने कूल्हे को आगे की तरफ धकेल कर यह सुनिश्चित करें कि आप अपनी उंगलियों के साथ ऊपर की ओर जा रहे हैं ना कि पीछे की तरफ मुड रहे हैं अब श्वास छोड़ते हुए रीड की हड्डी सीधी रखते हुए कमर से आगे झुके पूरी तरह श्वास छोड़ते हुए दोनों हाथों को पंजों के समीप जमीन पर रखे. हथेलियों को जमीन तक लाने में यदि आवश्यक हो तो घुटने मोड़ सकते हैं और घुटनों को सीधा करने का एक सरल प्रयास करें जब तक सूर्य नमस्कार का ये क्रम पूरा ना हो जाए तब तक अपने हाथों की इस स्थिति को इसी स्थान पर स्थिर रखें.


श्वास लेते हुए जितना संभव हो दाहिना पैर पीछे ले जाएं दाहिने घुटने को जमीन पर रख सकते हैं अब श्वास लेते हुए बाएं पैर को भी पीछे ले जाये और संपूर्ण शरीर को सीधी रेखा में रखें. अपने हाथ जमीन के लंबवत रखें आराम से दोनों घुटने जमीन पर लाएं और स्वास् छोडे. अपने कुल्हो को पीछे ऊपर की ओर उठाएं पूरे शरीर को आगे की ओर खिसकाये . अपनी छाती और थुड्डी जमीन से छुए अपने कुल्हो को थोड़ा उपर उठाकर ही रखें. अब दो हाथ दो पैर दो घुटने छाती और ढुड्डी ज़मीन को छूते हुए होंगे.


अब आगे की ओर सरकते हुये भुजंगासन में छाती को उठाएं, कोहनीया मुड़ी रह सकती हैं, कंधे कानों से दूर और दृष्टि ऊपर की ओर रखें. श्वास लेते हुए छाती को आगे की तरफ धकेलने का सौम्य प्रयास करें श्वास छोड़ते हुए नाभि को सहजता से नीचे की ओर दबाए पैरों की उंगलियों को भी नीचे की तरफ दबाये. यह सुनिश्चित करें कि जितना कर सकते हैं उतना ही करें. अपने साथ जबरदस्ती ना करें.

श्वाश छोड़ते हुए कुल्हो और रीड की हड्डी के निचले भाग को ऊपर उठाएं छाती को नीचे झुका कर एक उल्टे दिये के आकार में आ जाए. यदि संभव हो तो एडियों को जमीन पर ही रखें और रीड की भाग को ऊपर उठाने की कोशिश करें खिचाई को गहराई से अनुभव करें.


श्वास लेते हुए दाहिना पैर दोनों हाथों के बीच ले जाएं बाएं घुटने को जमीन पर रख सकते हैं दृष्टि ऊपर की ओर रखें दाहिने पंजे को दोनों हाथों की बीच में रखें और दाहिनी पिंडली को जमीन के लंबवत रखें. कुल्हो को नीचे की तरफ ले जाने का प्रयास करें ताकि खिचाव को गहरा हुआ अनुभव किया जा सके.


श्वाश छोडते हुये बाएं पैर को आगे लाएं हथेलियों को जमीन पर ही रहने दें अगर जरूरत हो तो घुटने मोड सकते हैं. अब धीरे धीरे घुटनों को सीधा करने की कोशिश करे और अगर संभव हो तो अपनी नाक से घुटनों को छूने का प्रयास करें और श्वास लेते रहे. श्वास लेते हुए रीड की हड्डी को धीरे-धीरे ऊपर लाएं हाथों को ऊपर और पीछे की ओर ले जाएं कूल्हों को आगे की तरफ धकेले.

 

सुनिश्चित करें कि कान बाजू से सटे हो और खिंचाव ऊपर की ओर हो ना कि पीछे की ओर. श्वाश छोड़ते हुए पहले शरीर सीधा करें फिर हाथों को नीचे लाएं इस अवस्था में विश्राम करें और शरीर में हो रही संवेदना के प्रति सजगता ले आए. यह था सूर्य नमस्कार.

 

सूर्य नमस्कार को करने से पहले आप इस चीज ध्यान रखे कि आप खाली पेट ही हो. सूर्य नमस्कार के लिए सुबह का वक्त सबसे अच्छा माना जाता है पर अगर आप दोपहर मे इसे करते हैं तो आपको तत्काल ऊर्जा मिलती है वहीं शाम को इस आसन को करने से तनाव कम होता है और अगर सूर्य नमस्कार आप तेज गति के साथ करें तो यह बहुत अच्छा व्यायाम साबित हो सकता है जो कि आपके बजन को कम करने में मदद कर सकता है.

 

सूर्य नमस्कार के लाभ

 

सूर्य नमस्कार मन को शांत करता है. एकाग्रता को बढ़ाता है. इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ओज की वृद्धि होती है. ये मांसपेशियों का सबसे अच्छा व्यायाम है ऐसा कहा जाता है कि सूर्य नमस्कार वह कर सकता है जो महीनों के संतुलित आहार से भी नहीं हो सकता.  स्वास्थ्य के प्रति सचेत महिलाओं के लिए यह वरदान है इससे ना सिर्फ आप अतिरिक्त कैलोरी कम करते हैं बल्कि पेट की मांसपेशियों के खिंचाव से बिना खर्चे से ही आप एक सही आकार पा सकते है.


सूर्य नमस्कार के कुछ आसन ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं जैसे कि थायराइड ग्रंथि.

अगर आप सूर्य नमस्कार नियमित करते हैं तो आपकी आपकी थायराइड जैसी समस्या भी खत्म हो सकती है.


सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से मासिक धर्म की अनियमितता खत्म होती है सूर्य नमस्कार का निरंतर अभ्यास चेहरे पर निखार लाता है झुर्रियों को आने से रोकता है और हमें युवा और कांति मान बनाता है. 


सूर्य नमस्कार के नियमित अभ्यास से मणिपुर चक्र बादाम के आकार से बढ़कर हथेली के आकार का हो जाता है जो कि हमारा दूसरा मस्तिष्क भी कहलाता है हमारी अंतर्दृष्टि विकसित कर यह हमें अधिक स्पष्ट और केंद्रित बनाता है मणिपुर चक्र के सिकुड़ने से अवसाद और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियों की ओर ध्यान जाता है. साथ ही साथ सूर्य नमस्कार शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखता है.

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