Makar sankranti history significance its importance – मकर संक्रांति त्यौहार का महत्व

Makar sankranti history significance its importance - मकर संक्रांति त्यौहार का महत्व

Makar sankranti history significance its importance – मकर संक्रांति त्यौहार का महत्व 

मकर सक्रांति  हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है मकर सक्रांति पूरे भारत में तथा नेपाल में किसी न किसी रूप में 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है क्योंकि आज के ही दिन सूर्य कर्क रेखा को छोड़कर मकर रेखा की तरफ आते हैं या फिर यूं कहें कि सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं इसलिए इस दिन को कहीं कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं इस पर्व को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम तथा तरीकों से मनाया जाता है.

Makar-sankranti

मकर सक्रांति क्यों मनाया जाता है ? – Why is Makar Sankranti celebrated ? 

शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता, उत्तरायण को देवताओं का दिन का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन जप तप दान स्नान का विशेश महत्व होता है. भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है यानी कि इक्वेटर से उपर स्थित है मकर सक्रांति से पहले सुर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर रहता है इसी कारण यहां पर बडी राते और दिन छोटे होते हैं और यहां पर सर्दी का मौसम होता है. जनवरी में इंडिया में ठंडी पड रही होती है लेकिन इसी समय ऑस्ट्रेलिया में या दक्षिण अफ्रीका में गर्मी होती है. तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस होता है. मकर सक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्ध की ओर आना शुरू हो जाता है इसलिए इस दिन से राते छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं. गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है. इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर से दिन बडे होने लगते हैं. इंडिया में ऐसा माना जाता है कि यहां पर मकर सक्रांति के बाद से दिन बड़े होने लगते हैं और गर्मी आने लगती है पश्चिमी देशों में क्रिश्मश के दिन यानी कि 25 दिसंबर से बडा दिन होना शुरु माना जाता है. 

मकर सक्रांति पर सूर्य की राशि में प्रवेश परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है. प्रकाश अधिक होने से प्राणियो मे चेतना अधिक होती है. एवम कार्य शक्ति में वृद्धि होती है. संपूर्ण भारतवर्ष में लोगों द्वारा मकर सक्रांति के शुभ अवसर पर विभिन्न रूपों में सूर्यदेव की उपासना, अराधना, पूजन करके उनके प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है.
 

ऐतिहासिक कारण – History

मकर सक्रांति मनाये जाने के पिछे ऐतिहासिक कारण यह भी है कि उस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं क्योंकि शनि देव मकर राशि के स्वामी है. अत: इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है. महाभारत के समय में भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने के लिए मकर सक्रांति के दिन को ही चयन किया था. मकर सक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर मे जा कर मिली थी इसलिए इस दिन को ऐतिहासिक रूप में भी देखा जा सकता है. मकर सक्रांति किसानों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है. इस दिन किसान अपनी फसल को काट्ते है. 

नेपाल में मकर सक्रांति कैसे मनाया जाता है ? 

नेपाल के सभी राज्यों में भक्ति एवं उत्साह के साथ धूमधाम से मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता है. मकर सक्रांति हरियाणा और पंजाब में लोहड़ी के नाम से भी जाना जाता है और 13 जनवरी को मनाया जाता है. उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से दान का पर्व है इलाहाबाद में गंगा-यमुना या गंगा यमुना सरस्वती संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है 14 जनवरी से इलाहाबाद में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है 14 दिसंबर से लेकर 14 जनवरी तक यह समय खरमास के नाम से जाना जाता है मकर सक्रांति के दिन लोग गंगा स्नान करते हैं दान धर्म करते हैं खिचड़ी खाते हैं और पतंग उड़ाते हैं. बिहार में मकर संक्रांति को खिचड़ी नाम से जाना जाता है इस दिन उड़द चावल चूड़ा स्वर्ण ऊनी वस्त्र कंबल आदि का दान करने का अपना ही महत्व है इसी तरह महाराष्ट्र बंगाल तमिलनाडु और राजस्थान में अलग-अलग तरह से माना जाता है.

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