Corona virus affect babies and kids – कोरोना वायरस शिशुओं और बच्चों को प्रभावित करता है

Corona virus for babies
आज के परिवेश में कभी-कभी यह महसूस होता है कि हम पुराने टाइम में जब बैकवर्ड थे अनपढ़ थे अशिक्षित थे तभी अच्छे थे 
Cutechild


आज जितना ज्यादा साइंस तरक्की करती जा रही है हम उतना ही परेशान और दुखी होते जा रहे हैं आश्चर्य की बात है कि एडवांस और बैकवर्ड की पहचान आधुनिकता ही बन गई है आज तरक्की और वैज्ञानिकता के नाम पर भारतीय नागरिक अपने स्वाभाविक खान-पान रहन-सहन दिनचर्या संयम सेवा आहार-विहार वेशभूषा और भाषा तक को तिलांजलि देकर खुश होना चाहता है.

वह गुलामी की प्रवृत्ति का शिकार होकर विदेशी संस्कृति को जल्दी से जल्दी अपनाने में अपना गौरव समझ रहा है मैकाले की शिक्षा द्वारा अंग्रेजी अर्थ हमारे खून में समा गई है जिसका परिणाम शारीरिक चारित्रिक व सामाजिक पतन के रूप में स्पष्ट दिखाई दे रहा है सर्वेक्षण करके देखें तो अनुभव से पाया गया कि सरकारी व निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों का 90 प्रति श्रद्धा और समय केवल अंग्रेजी की पढ़ाई में खर्च होता है किंतु परीक्षा परिणाम देखने पर पता लगता है कि 90% विद्यार्थी अंग्रेजी में ही फेल होते हैं जिसके कारण युवक आगे पढ़ने में असमर्थ हो जाते हैं पब्लिक स्कूल के बच्चों में विशेष रुप से शारीरिक व मानसिक विकलांगता बढ़ रही है जैसे चश्मा चढ़ना नाक बंद साइनस गले टॉन्सिल के बीमार चिड़चिड़ापन पेट ओपन पेट की खराबी जिद्दी पन (और वर्तमान समय मे कोरोना)  माता-पिता के झूठे लाड प्यार से देर तक उठना टीवी देखना पूरा दिन भर अपने आप को बहुत सुपीरियर्स सुखी रोरिटो कंपलेक्स में आ जाना अपने से बड़ों पर व्यंग कसना आदि दोष होने से पूरी शिक्षा यदि अच्छे से हो जाए और नौकरी ना मिले तो वह दुराचारी अन आचार्य और खून अपराधी बन जाते हैं जबकि आज तक कोई वक्त जो गुरुकुल और संस्कृत पाठ शालाओं में पड़ा हुआ है अपराधी नहीं बना ऐसे तरक्की वाले मॉडल जो आज एडवांस और फॉरवर्ड के नाम से बोला जाता है 

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