Which are the popular stories related to Ganesha born
श्री गणेशजी (Lord Ganpathi) कि जन्मकथा:-
एक बार जब सम्पूर्ण सृष्ठी से रिद्दी सिद्दी चली गयी तो पुरे ब्रह्माण्ड में घोर अँधेरा और अत्रिप्त्ता छा गयी उस समय lord Shiva घोर तपस्या में लीन थे जब कोई भी उपाय किसी को समझ नहीं आया तो माँ लछमी जी के उपयानुशार माँ पार्वती ने अपने शारीर के मैल से गणेश जी को उत्पन्न किया. वर्षो कि समाधी के पश्चात् जब शिव जी कैलाश पर्वत पर वापस लौटे और माँ पार्वती से मिलने उनके कच्छ कि तरफ जाने लगे तब द्वार पर खड़े गणेश जी ने उन्हें अन्दर जाने से रोका क्युकि माँ पार्वती ने उन्हें आदेश दिया था कि कोई भी मेरे अनुमति के घर में प्रवेश न कर सके, आग्यानुशार पालन करते हुए उन्होंने शिव जी को अन्दर जाने नहीं दिया . गणेश जी अनभिज्ञता के कारण शिव जी ने उनके शिर को धड से अलग कर दिया . गणेश जी को भूमि पर मृत देख माँ पार्वती विचलित हो गयी उन्होंने गणेश जी (Indian elephant god) को पुनः जीवित करने के लिय भगवान शिवजी से अनुरोध किया तत्पश्चात शिव जी ने गणेश जी (Ganpati bhagwan) के धड पर हाथी का सिर लगा दिया और प्रथम पूज्य का वरदान दिया.
Lord Ganesha को क्यों प्रिय है मोदक का प्रसाद ?
गणेश जी (Eco friendly Ganesha) की मोदक और लड्डू की पसंद के पीछे एक कहानी है. एक बार की बात है जब भगवान गणेश जी भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी से युद्ध कर रहे थे. लड़ाई के दौरान गणेश जी का दांत टूट गया और उन्हें खाने में दिक्कत होने लगी. इसके बाद उनके लिए स्वादिष्ट लड्डू और मोदक तैयार किए गए, जो उनके मुंह में जाते ही घुल गए. विघ्नहार्ता गणपति (Vighnaharta Ganesha) को यह बहुत पसंद आया और मोदक उनका प्रिय भोजन बन गया यही वजह है कि लोग गणपति चतुर्थी को विशेष रूप से लड्डू जरूर चढ़ाते हैं और प्रसाद के रूप में बांटते भी हैं. दरअसल ‘मोदक’ शब्द का अर्थ होता है ‘खुशी’, जिसे खाते ही व्यक्ति प्रसन्न हो जाता है. इसे मराठी में मोदक कहते हैं. तेलगू में कोंकणी, मोदकम या कुडूमू कहते हैं. कन्नड़ में मोदक या कडूबू, मलयालम में कोझकट्टा या मोडकक्कम और तमिल में कोझुकाट्टई या मोडगम कहते हैं.
